130th Constitutional Amendment Bill 2025 Hindi


130th Constitutional Amendment Bill 2025 Hindi: 30 दिनों की गिरफ्तारी पर PM, CM और मंत्रियों की कुर्सी जाएगी

Constitution (One Hundred and Thirtieth Amendment) Bill 2025

भारत में राजनीति और नैतिकता पर चर्चा छिड़ गई है जब 130वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025 (Constitution (One Hundred and Thirtieth Amendment) Bill, 2025) लोकसभा में पेश किया गया। यह विधेयक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्र/राज्य मंत्रियों को 30 दिनों से अधिक समय तक गिरफ्तारी में रहने पर स्वचालित रूप से पद से हटाने का प्रावधान लाता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि इसमें क्या प्रावधान हैं, राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ कैसी रही, इसके कानूनी आधार और संभावित प्रभाव क्या होंगे।
(Navbharat Times, Wikipedia)


क्या है यह विधेयक? मुख्य प्रावधान

Constitution (One Hundred and Thirtieth Amendment) Bill 2025
  1. क्यों जरूरी महसूस हुआ
    वर्तमान व्यवस्था में मंत्री तब तक पद पर बने रह सकते हैं जब तक दोषसिद्धि (conviction) नहीं होती। लेकिन यह स्थिति नैतिक और प्रशासकीय जिम्मेदारी को कमजोर करती है। इसी अंतर को पाटने के लिए यह बिल पेश किया गया है (Jagranjosh.com, Vajiram & Ravi)।
  2. कौन-कौन इसमें शामिल है
    • प्रधानमंत्री
    • केंद्रीय मंत्री
    • मुख्यमंत्री और राज्य मंत्री
    • दिल्ली (एनसीटी) में भी लागू, और साथ ही अन्य संघ शासित प्रदेश (UTs) और जम्मू-कश्मीर में भी विस्तार किया गया है (Navbharat Times, The Economic Times)।
  3. कानूनी परिवर्तन – अमेंड करने वाले अनुच्छेद
    • Article 75 – केंद्र सरकार (PM और केन्द्रीय मंत्री)
    • Article 164 – राज्य सरकार (CM और राज्य मंत्री)
    • Article 239AA – दिल्ली के लिए विशेष प्रावधान
      इन आर्टिकल्स में 30 दिनों की गिरफ्तारी पर पद हटाने का प्रावधान जोड़ा जाएगा (Vajiram & Ravi)।
  4. कैसे होगा पद से हटना
    • यदि किसी मंत्री या मुख्यमंत्री को 30 दिनों तक निरंतर हिरासत में रखा जाता है, तो:
      • केंद्र स्तर: राष्ट्रपति पीएम के सुझाव पर उन्हें पद से हटा देंगे; यदि सुझाव न मिले, तो पद स्वतः होश रहा माना जाएगा (LawBeat)।
        (LawBeat)।

        (The Economic Times)।
  5. पुनर्नियुक्ति (Reappointment)
    गिरफ्तारी से मुक्त होने पर पुनः उसी पद पर नियुक्त होना संभव है (Wikipedia)।
  6. कॉमनिटी प्रक्रिया और विधायी मार्ग
    यह विधेयक 20 अगस्त 2025 को अमित शाह द्वारा लोकसभा में पेश किया गया और Joint Parliamentary Committee (JPC) को भेजा गया, जो सुधार और सुझाव देगी (The Indian Express)।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

130th Constitutional Amendment Bill 2025 Hindi
130th Constitutional Amendment Bill 2025 Hindi
  • सरकार का तर्क:
    गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि यह विधेयक भ्रष्टाचार और अपराधीकरण के खिलाफ एक मजबूत कदम है, जो “राजनीति को नैतिकता से जोड़ता है” और यह “प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत सभी को कानून के दायरे में लाता है” (Press Information Bureau, The Economic Times)।
  • विपक्ष की आपत्ति:
    • कांग्रेस ने इसे “Draconian Act” करार दिया, आरोप लगाया कि यह विधेयक विपक्षियों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल हो सकता है (constitutionnet.org, www.ndtv.com)।
    • केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे “neo‑fascist strategy” बताते हुए इसे संघ-भाजपा का लोकतंत्र विरोधी कदम बताया (The Times of India)।
    • अन्य विपक्षी नेता—जैसे औवैसी, ममता बनर्जी—ने इसे “separation of powers और natural justice” के खिलाफ कहा और डर जताया कि यह अधिकारों और संवैधानिक संतुलन को कमजोर कर सकता है (Indiatimes, The Economic Times, The Times of India)।

विधायिकीय प्रक्रिया

  • Article 368 के तहत संविधान में संशोधन हेतु दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में विशेष बहुमत (दो-तिहाई) से पारित होना आवश्यक है, और कुछ मामलों में राज्यों की विधानसभा अनुमोदन भी जरूरी होती है (Wikipedia)।
  • फिलहाल यह बिल JPC को भेजा गया है, जो अगले सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा (The Economic Times, The Indian Express)।

संभावित प्रभाव

  • सकारात्मक:
    राजनीति में अंतरिम नैतिकता, जनता का विश्वास और प्रत्याशित जवाबदेही बढ़ सकती है।
  • संभावित जोखिम:
    गिरफ्तारी का राजनीतिक रूप से दुरुपयोग—विशेष रूप से विपक्षियों को निशाना बनाया जाना।
  • न्यायिक समीक्षा:
    विपक्ष और विशेषज्ञ भविष्य में सुप्रीम कोर्ट में यह विधेयक चुनौती दे सकते हैं, विशेष रूप से ‘natural justice’ और separation of powers के आधार पर।

निष्कर्ष

130वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025 एक निर्णायक कदम है राजनीति में नैतिकता और जवाबदेही लाने की दिशा में। यदि पारदर्शिता से लागू हुआ, तो यह लोकतंत्र के हित में हो सकता है। लेकिन यदि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने में प्रयोग हुआ, तो यह संवैधानिक मूल्यों को कमजोर कर सकता है। आगे की प्रक्रिया (JPC रिपोर्ट, संसद बहस, और संभवतः न्यायालय में चुनौती) इस विधेयक की दिशा तय करेगी।


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